सक्रियता (Activity)
भोजन के बाद १०-१५ मिनट की हल्की सैर (Vajrasana या Walking) शर्करा के स्तर को स्थिर करने में अद्भुत काम करती है।
उम्र के साथ शरीर की आंतरिक लय को समझना और सामंजस्य स्थापित करना। एक स्वस्थ भविष्य के लिए आज ही सही आदतें अपनाएं।
मानव शरीर एक अद्भुत मशीन है जो समय के साथ विकसित होती है। ४० और ५० की उम्र के बाद, हमारी आंतरिक प्रणाली स्वाभाविक रूप से धीमी होने लगती है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि जीवन का एक चरण है जिसे 'अनुकूलन' की आवश्यकता होती है।
अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता और इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता में बदलाव आना सामान्य है। इस चरण में शरीर को ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने के लिए थोड़े अधिक सहयोग की आवश्यकता होती है। इसे समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है।
उम्र बढ़ने के साथ बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कम हो जाता है। इसका अर्थ है कि हमें युवावस्था की तुलना में कम कैलोरी की आवश्यकता होती है, लेकिन पोषक तत्वों की मांग बढ़ जाती है।
मांसपेशियां ग्लूकोज का सबसे बड़ा उपभोक्ता होती हैं। उम्र के साथ मांसपेशियों में कमी आने से रक्त में शर्करा का स्तर असंतुलित हो सकता है यदि हम सक्रिय न रहें।
कार्बोहाइड्रेट का सेवन शरीर की वर्तमान ऊर्जा खपत के अनुसार होना चाहिए। अतिरिक्त ऊर्जा जो खर्च नहीं होती, वह शारीरिक प्रणाली पर दबाव डालती है।
संतुलन केवल भोजन तक सीमित नहीं है, यह एक समग्र दृष्टिकोण है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में, तनाव (Stress) एक प्रमुख कारक है जो हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है। कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन सीधे रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
"स्वास्थ्य कोई गंतव्य नहीं है, यह जीवन जीने का एक तरीका है। छोटी-छोटी दैनिक आदतें मिलकर बड़े परिणाम देती हैं।"
नियमित नींद और मानसिक शांति उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आपकी थाली में परोसा गया भोजन। प्रकृति के करीब समय बिताना और सकारात्मक सोच रखना भी चयापचय स्वास्थ्य का समर्थन करता है।
सक्रियता (Activity)
भोजन के बाद १०-१५ मिनट की हल्की सैर (Vajrasana या Walking) शर्करा के स्तर को स्थिर करने में अद्भुत काम करती है।
फाइबर (Fiber)
अपने भोजन में सलाद, मेथी, और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं। फाइबर पाचन को धीमा करता है, जिससे ऊर्जा धीरे-धीरे रिलीज होती है।
जलयोजन (Hydration)
अक्सर प्यास को भूख समझ लिया जाता है। दिन भर घूंट-घूंट करके पानी पीना किडनी को टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है।
आलोक वर्मा
पुणे, महाराष्ट्र
मीरा नायर
कोच्चि, केरल
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